उत्तराखण्ड का पौराणिक इतिहास

उत्तराखण्ड का इतिहास पौराणिक काल जितना पुराना है। उत्तराखण्ड का शाब्दिक अर्थ उत्तरी भाग होता है। इस नाम का उल्लेख प्रारम्भिक हिन्दू ग्रन्थों में भी मिलता है, जहाँ पर केदारखण्ड (वर्तमान गढ़वाल) और मानसखण्ड (वर्तमान कुमाऊँ) के रूप में इसका उल्लेख हुआ है। उत्तराखण्ड प्रचीन पौराणिक धब्द भी है जो हिमालय के मध्य फैलाव के…

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Pandav Nritya – Garhwal

Dear Villagers, As we near the fourth anniversary of Syund Gaon’s Pandav Nritya, rejuvenate and reflect upon the traditional dance memories. The dwindling traditional values motivate me keep alive the village culture alive for posterity…

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Hai Mera Pyaaraa “Kedar”

कुदरत का बरसेगा ऐसा कहर … ऐसा होगा अत्याचार , चारों ओर मचा था हाहाकार ….. हाय मेरा प्यारा “केदार” । ना बचा भगवान ….ना ही इंसान , कुछ क्षणों का था वो तूफ़ान , बह गए ना जाने कितने लोग ….. करने गए थे यात्रा जो चार धाम । बह गए घर रेत में…

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A JOURNEY Short Story

I don`t know what is happening but their is a lot of voice coming from everywhere. MOM, DAD, SAHIL all are shouting and crying.They are running here and there. Why are they doing so? What happens to them? Their is a lot of chaos in the house. But we are calm, we are still. So…

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नारी

1.नारी शक्ति देवी का प्रतिरूप , आवाज बहुत है प्यारी , आँखों में इक नजाकत , बदन पे है साडी, किसी की जान वो , बिन उनके जीवन है खाली, उनके जैसा कोई न , हर जगह वो ही है छाई , पलट दे जो दुनिया की तस्वीर वो है नारी || 2.नारी सम्मान हर…

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बह गया

बह गया वो घर बह गयीं घर में रखी तसवीरें तस्वीरों में मुस्कुराते चेहरे बह गए परिवार बह गए, सैकड़ों, हज़ारों बह गयी वो प्रार्थना श्रद्धा में झुके शीश बह गए सुना है एक माँ का जब एक बच्चा बहा माँ देख उसे कूद पड़ी नदिया में.. बह गयीं लोरियां बच्चों की किलकारियां पिता बह…

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त्रासदी केदारनाथ की…,

लहर उठी तो तहस नहस क़र के चली तांडवरूप केदारनाथ से आरंभ हो कर चली विध्वंसकारी रूप बन कर मचली विनाशकरी विस्तृत रूप दिखाकर चली राहों की बाधाएं एवं बंधन गिरा के चली मेरे आवरण से छेड़खानी करने वालो को अपना रूप दिखाकर चली नहीं कर पाई भेद जीव में अथवा निर्जीव में नास्तिक में…

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यहां से मिला जुकरबर्ग को FB का नया मिशन

आज हम आपको नैनीताल से 65 किलोमीटर दूर बने ऐसे आश्रम के बारे में बता रहे हैं। जहां दुनिया की नामी शख्सियतें आकर साधना कर चुकी हैं, यह दावा उन्होंने खुद किया है। पंतनगर के बाबा नीम करौली आश्रम में आने के बाद लोगों के जीवन की बाधाएं दूर हो गईं और उन्हें अपनी फील्ड…

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ऐंपण (अल्पना) – अपनी उत्तराखंडी परम्परा

घर की सजावट में ही लोक कला सबसे पहले देखने को मिलती है। दशहरा, दीपावली, नामकरण, जनेऊ आदि शुभ अवसरों पर महिलाएँ घर में ऐंपण (अल्पना) बनाती है। इसके लिए घर, ऑंगन या सीढ़ियों को गेरू से लीपा जाता है। चावल को भिगोकर उसे पीसा जाता है। उसके लेप से आकर्षक चित्र बनाए जाते हैं।…

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