सीमांत गांव गंगी के बहुरेंगे दिन

आजादी मिलने के बाद भी सड़क, बिजली – पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं से महरुम गंगी गांव के दिन अब बहुरने वाले हैं. तिब्बत सीमा से सटे जिले के आखिरी गांव गंगी के लिए सड़क निर्माण की डीपीआर शासन को चली गई है. जल्द ही मंजूरी मिलने के बाद गंगी के लिए सड़क निर्माण का कार्य…

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शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ

गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव से उत्तराखंड में चार धाम शीतकालीन यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तर्ज पर मुखबा में भी तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यात्रा का श्रीगणेश किया। अब पहली बार चार धाम यात्रा वर्षभर चलेगी। अब तक परंपरा के अनुसार शीतकाल…

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सरकारी स्कूलों से हो रहा मोहभंग

उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में कायाकल्प की उम्मीद की जा रही थी, किन्तु राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा भरोषा खोने वाली उत्तराखंड की बुनियादी सरकारी शिक्षा मानी जा रही है. उत्तराखंड में मास्टरी का मतलब अब एक अदद सरकारी नौकरी भर बनके रह गई है. उत्तराखंड में…

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कविल्ठा, कालीदास की जन्मभूमि

मित्रो ! आप यह जानकर गौरवान्वित महसूस करेगे कि भारत वर्ष के महानतम कवि कालीदास का जन्म उत्तराखंड में हुआ था. तब गढ़वाल केदारखंड और कुमाऊ मानसखंड से नामित था. इनका जन्म ३३५ इसवी में मन्दाकिनी क्षेत्र में गुप्तकाशी के कालीमठ के आसपास स्थित “कविल्ठा” ग्राम में हुआ था. इनके बाल्यकाल का नाम बांदरु था…

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फिर उत्तराखंड की उपेक्षा

केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में भी उत्तराखंड को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. जिससे पहाड़ की जनता निराश है. केंद्र सरकार में उत्तराखंड की भागीदारी न होने का अपने आप में एक रिकार्ड भी बन गया है. देश भर में अब उत्तराखंड के अलावा कोई ऐसा प्रदेश नहीं बचा है जहां से भाजपा को कोई…

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उत्तराखंड के गांधी को नमन

९ नवंबर को उत्तराखंड राज्य निर्माण के १४ वर्ष पूरे हो गए. सबसे पहले uttarakhand के शहीदों को शत-शत नमन. जब हम बात उत्तराखंड की करें तो अलग राज्य के सपने को हकीकत में बदलने का श्रेय जाता है स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी को. बडोनी जी का जन्म उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखोली ब्लाक…

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सतत संघर्ष से बना उत्तराखंड

Uttarakhand राज्य निर्माण के १४ वर्ष पूरे हो रहे हैं. आएं जाने कैसा बना हमारा अलग राज्य. Uttarakhand संघर्ष से राज्य के गठन तक की कुछ महत्वपूर्ण तिथि-घटनाएं- * भारतीय स्वतंत्रता आन्देालन की एक इकाई के रूप में उत्तराखंड में स्वाधीनता संग्राम के दौरान १९१३ के कांग्रेस अधिवेशन में उत्तराखण्ड के अधिकांश प्रतिनिधि सम्मिलित हुए. इसी…

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गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी !

उत्तराखंड राज्य निर्माण के 14 साल बाद भी उत्तराखंड की स्थाई राजधानी का मुद्दा केवल चुनावी मुद्दा रह गया है. हकीकत ये है की गैरसैण जनभावनाओं से जुड़ा होने के कारण न कोई सरकार इस पर मना करती है, न ही राजधानी बनाने ही ठोस पहल. हाल की सरकार ने गैरसैण में बैठक और विधानभवन…

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पहले से ज्यादा हो रहा पलायन

उत्तराखंड से पलायन सबसे बड़ी समस्या रही है. अलग राज्य बन जाने के बाद लोगों को लगा था की इस पहाड़ की प्रमुख समस्या से छुटकारा मिल जायेगा, किन्तु राज्य निर्माण के 14 साल बाद भी पहाड़ों से पलायन नहीं थमा है. आंदोलनकारी गोपू महर का तो कहना है कि सरकार अब तक वन, रोजगार…

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जागे विष्णु, तुलसी संग विवाह

देवप्रबोधनी एकादशी का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है. कारण यह है कि इस दिन चार महीने के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा से जगते हैं. भगवान विष्णु जब तक सोते हैं तब तक कोई भी शुभ काम जैसे शादी, जनेऊ, मुंडन, मकान की नींव देने का काम नहीं किया जाता है. लेकिन देव प्रबोधनी…

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