सुहागिनों का पर्व करवा चौथ

भारत त्योहारों का देश है. करवा चौथ जो की आज शनिवार को है. भारतीय महिलाएं इस पावन पर्व को उल्लास के साथ मनाती हैं. इस बार चन्द्रोदय रात्रि 8. 21 को है. करवा चौथ व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को किया जाता है. विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य का कारक होता है. विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की कामना करके चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत को पूर्ण करती हैं. इस व्रत में रात्रि बेला में शिव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा का विधान है. इस दिन निर्जला व्रत रखकर चंद्र दर्शन और अर्घ्य अर्पण कर भोजन ग्रहण किया जाता है. पीली मिट्टी की गौरी भी बनाई जाती है. कई महिलाएं काली चिकनी मिट्टी के कच्चे करवे में चीनी की चाशनी बनाकर डाल देती हैं अथवा आटे को घी में सेंककर चीनी मिलाकर लड्डू आदि बनाती हैं. नवविवाहिताएं विवाह के पहले वर्ष से ही यह व्रत प्रारंभ करती हैं. चौथ का व्रत चौथ से ही प्रारंभ कराया जाता है. इसके बाद ही अन्य महीनों के व्रत करने की परंपरा है. अपनी सासु मां को 13 लड्डू, एक लोटा, एक वस्त्र, कुछ पैसे रखकर एक करवा चरण छूकर देने की भी परम्परा है. करवा चौथ के व्रत संबंध में कई लोककथाएं प्रचलित हैं. एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए. इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं. उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की. कृष्ण भगवान ने कहा – बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था. तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया. इस व्रत से स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से कर सकती हैं. प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था. उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी. एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा. उसने व्रत को विधिपूर्वक किया. पूरे दिन निर्जला रही. कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी. भाइयों से रहा नहीं गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया. एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी. तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी – देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो. बहन ने भोजन ग्रहण किया. भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई. अब वह दुखी हो विलाप करने लगी, तभी वहां से रानी इंद्राणी निकल रही थीं. उनसे उसका दुख न देखा गया. ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला. अब तू वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा. उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई. इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए. द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए. तभी से अपने अखंड सुहाग के लिए हिन्दू महिलाएं करवा चौथ व्रत करती हैं.

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