मायके के मोह में बंधी नंदा चलीं ससुराल नौटी से शुरू हुई श्रीनंदा राजजात

मौसम के बीच पूजा-अर्चना के साथ चमोली जिले के नौटी से सोमवार को श्रीनंदा राजजात का श्रीगणेश हो गया. मां नंदा को मायके से ससुराल यानी कैलास विदा करने की 14 साल बाद हो रही इस यात्रा के दौरान भक्तों में आस्था, उल्लास और भावुकता की त्रिवेणी प्रवाहमान दिखी.

नंदा मंदिर परिसर में राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर के नेतृत्व में राजछत्र और चौसिंग्या खाडू के साथ श्रद्धालुओं ने दिन में 11.35 बजे नौटी से पहले पड़ाव ईड़ा बधाणी के लिए प्रस्थान किया. नंदा राजजात यात्रा के मुख्य संरक्षक और राज्यपाल अजीज कुरैशी ने यात्रा का शुभारंभ किया.

नौटी से करीब चार किलोमीटर की सीधी चढ़ाई चढ़ कर नंदा जब बगरखाल पहुंचीं तो छातौली गांव की महिलाओं के लिए नंदा को विदा करने की बेला थी। यहां से उनकी सवारी सिलंगी को चली. बगरखाल से करीब दो किलोमीटर दूर इस गांव में नंदा की बहन उफरांई देवी का मंदिर है. यहां नंदा उफरांई से मिलीं तो पूरा गांव भाव विभोर हो उठा. जागर गूंज रहे थे. पूरे रास्ते नंदा ने भोले-भाले ग्रामीणों की भेंट स्वीकार की. भक्ति का ऐसा माहौल बना कि लगा जैसे सिलंगी में देवता धरा पर मानवों के बीच में उतर आए हैं. पुरुष पीछे हैं, महिलाएं आगे। देवी के साथ चल रहे चौसिंग्या मेढ़े (खाड़ू) को छूने, उसे भेंट देने की होड़ मची है। महिलाओं का आंचल पसरा है। ढोल, दमाऊं, रणसिंघा, भंकोरू की गूंज के बीच अक्षत के दाने आंचल में गिर रहे हैं. यात्रा के दौरान नंदा के सामने पहाड़ की महिलाओं का मायके के प्रति अटूट प्रेम प्रकट हुआ. सिलंगी में उफरांई के साथ गले मिलकर नाचती नंदा का मायके से निकलने का दर्द गांव की महिलाओं के गीतों में सामने आया. नंदा का मायका खूब भरा-पूरा है पर शिव का धाम उतने ही कष्टों से भरा. जागर में ससुराल के कठोर जीवन, वहां के कष्ट नंदा को भेंट देती महिलाओं के सुरों में छलक आया. नंदा देवी राजजात पूर्व पीठिका समिति के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद तरुण विजय सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की भेंट और चढ़ावा लेकर नौटी पहुंचे. भेजा गया है.

Share with your friend...Share on FacebookTweet about this on TwitterShare on LinkedInShare on Google+Email this to someone