बंद होंगे 1800 बेसिक स्कूलों !

उत्तराखंड के गांवों से पलायन का असर उत्तराखंड के प्राथमिक स्कूलों पर दिख रहा है. अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा की खातिर पहाड़ से लोग गांव छोड़कर मैदानी भागों में बस रहे हैं. आजकल गांव में जो लोग रह भी रहे हैं वे या तो बुजुर्ग हैं या फिर वो लोग हैं जिनके बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं. इस सबके कारण पहाड़ के स्कूलों में छात्रों का अकाल है. कई गांव एसे हैं जहां रहने वालों की संख्या बहुत कम है. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का गिरता स्तर लोगों को निजी स्कूलों की तरफ धकेल रहा है. अब सरकारी स्तर पर भी सूने पड़े उत्तराखंड में करीब 1800 प्राइमरी स्कूलों को अगले शिक्षा सत्र बंद किये जाने पर विचार हो रहा है. कई स्कूल एसे हैं, जिनमें छात्र संख्या 10 से भी कम है. सरकार एसे स्कूलों को पढ़ रहे बच्चों को निकटतम स्कूल में मर्ज करने की तैयारी कर रही है. राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में इस समय पांच लाख 56 हजार छात्र हैं. असहायतित और सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों की संख्या जोड़ने पर यह संख्या करीब साढ़े दस लाख हो जाएगी. प्रदेश में कुल मिलाकर 15428 प्राथमिक विद्यालय हैं. बंद होने वाले स्कूलों के छात्रों को दो-तीन गांवों के बीच के स्कूल में समायोजित किया जाएगा. ब्लॉक मुख्यालयों में नवोदय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय भी बनाने की योजना चल रही है. मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के छात्रों को इन आवासीय विद्यालयों में भी जगह दी जा सकती है.

Share with your friend...Share on FacebookTweet about this on TwitterShare on LinkedInShare on Google+Email this to someone