खोलें निजी शिक्षण संस्थान

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने के इच्छुक लोगों के लिए खुशखबरी है. यदि आप उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उच्च शिक्षण संस्थान खोलने के इच्छुक हैं तो सरकार कई रियायतें डे रही है. इस कड़ी में दूसरी बार निजी उच्च शिक्षण संस्थाओं को प्रोत्साहित करने की नीति में संशोधन किया गया है. अब निजी उच्च शिक्षण संस्थान के प्रवर्तकों (प्रमोटर्स) की माली हैसियत के लिए जरूरी धनराशि को 10 करोड़ से घटाकर दो करोड़ किया गया है. वहीं निजी संस्थान के लिए पांच एकड़ भूमि की शर्त को घटाकर ढाई एकड़ किया गया है. नई नीति पालीटेक्निक और आइटीआइ खोलने के लिए भी लागू होगी. प्रदेश के विषम भौगोलिक क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए निजी क्षेत्रों का सहयोग लेने की सरकार की मंशा अभी परवान नहीं चढ़ सकी है. निजी क्षेत्र देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और उधमसिंह नगर में उच्च शिक्षण संस्थान खोलने में रुचि ले रहे हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों का रुख करने को तैयार नहीं हैं. पर्वतीय क्षेत्रों में निजी उच्च शिक्षण संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए बीती पांच सितंबर को जारी शासनादेश में कई सहूलियतें दी गई थीं. दो माह से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद निजी क्षेत्र की ओर से एक भी प्रस्ताव नहीं मिला। इसके चलते राज्य मंत्रिमंडल की बीती 10 नवंबर को हुई बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में निजी शिक्षण संस्थानों में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने को नीति में संशोधन को हरी झंडी दी गई. सरकार ने प्रस्तावक संस्थानों के प्रवर्तकों (प्रमोटर्स) की सुदृढ़ वित्तीय स्थिति की धनराशि 10 करोड़ से घटाकर दो करोड़ की है. वहीं संस्थान के लिए पांच एकड़ भूमि के बजाए 2.5 एकड़ भूमि अनिवार्य की गई है. यही नहीं संशोधित नीति पर्वतीय क्षेत्रों में आइटीआइ और पालीटेक्निक खोलने पर लागू होगी. उन्होंने उम्मीद जताई की कि संशोधन में दी गई सहूलियतों का लाभ लेकर निजी क्षेत्र पर्वतीय क्षेत्रों में स्तरीय उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए आगे आएगा.

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