जीवन देती हैं दाई

पहाड़ के जीवन की जब हम बात करें तो इन्शान को जन्म देने वाली माँ के साथ ही दूसरी बड़ी महत्वपूर्ण महिला गाँव में ‘दाई’ होती थी. दाईयों को पहाड़ में महिलाओँ को दूसरा जन्म देने वाली माँ भी कहा जाता था. सकुशल प्रसब करना और इस वेदना में बच्चे और माँ का जीवन बचाना ‘दाई’ के भरोषे होता था. ‘दाई’ का काम उनका धर्म कार्य माना जाता था. ‘दाई’ जात-पांत और अन्य बंधनों से ऊपर उठ कर महिलाओं के प्राणों की रक्षा करती थी. ‘दाई’ को बड़े आदर-भाव से देखा जाता था. ‘दाई’ को प्रसब कराने के लिए उचित इनाम भी दिया जाता था. ‘दाई’ महिलाओं के विश्वास की मूर्ति होती थी और कभी प्रसब के दौरान कोई अपयश भी हो जाय तो ‘दाई’ को जिम्मेदार नहीं माना जाता था. ‘दाई’ दिन-रात सेवा के लिए तत्पर रहती थीं. बारिश हो या बर्फ लोग ‘दाई’ बुलाने पर कभी प्रसब कराने जाने से मना नहीं करती थी. ‘दाई’ का काम ज्यादातर उम्रदराज महिलाएं करती थी. कभी-कभी बहुत उम्र की दाईयों को पीठपर उठाकर भी घर पहुचाते थे.

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