गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी !

उत्तराखंड राज्य निर्माण के 14 साल बाद भी उत्तराखंड की स्थाई राजधानी का मुद्दा केवल चुनावी मुद्दा रह गया है. हकीकत ये है की गैरसैण जनभावनाओं से जुड़ा होने के कारण न कोई सरकार इस पर मना करती है, न ही राजधानी बनाने ही ठोस पहल. हाल की सरकार ने गैरसैण में बैठक और विधानभवन के निर्माण आदि कार्यों से राजधानी के मुद्दे को जीवित रखने भर की ही कोशिश की है. उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैण को बनाने को लेकर किसी को एतराज नहीं है, सिर्फ सरकार की इच्छाशक्ति की जरूरत है. राज्य निर्माण के बाद स्थाई राजधानी के मुद्दे को हल्का करने की कोशिशें उत्तराखंड सरकार करती रही हैं और अब भी इस मुद्दे को हल्का करने की कोशिशें शुरू हैं. एक तरफ सरकार गैरसैण को नहीं छोडती दूसरी तरफ देहरादून में भी निर्माण कार्यों पर खर्च कर रही है. गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की भी बातें जोर पकड़ रही हैं. इसका मतलब साफ है कि उत्तराखंड की स्थाई राजधानी देहरादून से कहीं नहीं जाने वाली, अब बहुत हुआ तो गैरसैण सरकारी पिकनिक केंद्र यानी ग्रीष्मकालीन राजधानी के सिवा कुछ नहीं बनेगा. उत्तराखंड के प्रमुख विपक्षी दल भाजपा नेतृत्व भी गैरसैंण में स्थायी या ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के खिलाफ नहीं है. नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने संयुक्त रूप से कहा कि कांग्रेस को राजधानी के मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सरकार गैरसैंण में स्थायी राजधानी बनाएगी या ग्रीष्मकालीन, इस बारे में अपना निर्णय जल्द घोषित करना चाहिए. सरकार जो भी निर्णय ले भाजपा को कोई ऐतराज नहीं है. उन्होंने कहा भाजपा जनभावनाओं के साथ है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले में नौटंकी कर रही है. एक तरफ वहां विधानभवन का निर्माण शुरू हो गया है, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधानभवन में सचिवालय निर्माण के लिए 25 लाख रुपए मंजूर करने की घोषणा की है. दोनों नेताओं ने कहा कि विधान भवन में तो सचिवालय होता ही है. इसलिए सचिवालय के लिए अलग से धन देने की बात समझ से परे है. वहीं सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि गैरसैंण में शीघ्र ग्रीष्मकालीन राजधानी बना दी जानी चाहिए. उधर, उत्तराखंड क्रांति दल का गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का प्रमुख मुद्दा रहा है.

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