पहले से ज्यादा हो रहा पलायन

उत्तराखंड से पलायन सबसे बड़ी समस्या रही है. अलग राज्य बन जाने के बाद लोगों को लगा था की इस पहाड़ की प्रमुख समस्या से छुटकारा मिल जायेगा, किन्तु राज्य निर्माण के 14 साल बाद भी पहाड़ों से पलायन नहीं थमा है. आंदोलनकारी गोपू महर का तो कहना है कि सरकार अब तक वन, रोजगार की नीति नहीं बना पाई और पलायन की स्थिति यह है कि यूपी के समय से ज्यादा पलायन हो रहा है. उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने ने पहाड़ के इसी ज्वलंत मुद्दे पर ‘उत्तराखंड बचाओ, उत्तराखंड बसाओ’ जन जागरण यात्रा 10 अक्तूबर से 3 नवंबर तक गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के क्षेत्रों में निकाल कर सरकार का ध्यान इस ओर खींचा. श्री एरी ने पहाड़ों से युवाओं का निरंतर पलायन न बल्कि उत्तराखंड, बल्कि देश के सीमांत क्षेत्र के लिए भी बेहद चिंता का विषय बताया है. उन्होंने इसके लिए प्रदेश सरकार की गलत नीतियों को पूरी तरह से जिम्मेदार बताया है. पिथौरागढ़ में ‘उत्तराखंड बचाओ, उत्तराखंड बसाओ’ यात्रा के समापन पर पत्रकारों से बात करते हुए ऐरी ने कहा कि राज्य गठन के 14 सालों में प्रदेश की और अधिक दुर्दशा हुई है. भाजपा, कांग्रेस की सरकारों ने प्रदेश को लूटने का काम किया है. प्राकृतिक संसाधनों का जमकर विदोहन किया जा रहा है. बंदरों, जंगली सुअरों से खेती चौपट हो रही है. चीन ने देश की सीमा तक सड़क, संचार, रेल सुविधाओं का विस्तार कर दिया है. ऐसे में लगातार खाली होते गांवों से देश की सीमा असुरक्षित हो गई है. एरी की ‘उत्तराखंड बचाओ, उत्तराखंड बसाओ’ जागरूकता यात्रा को गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में लोगों का भरपूर सहयोग मिला. उत्तराखंड में इसी मुद्दे पर 8 नवंबर तक जिला मुख्यालयों में क्रमिक अनशन और 21 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए बगैर वहां विधानभवन बनाने, कैबिनेट बुलाने भर से प्रदेश का भला नहीं होने वाला. यह सरकार की जनता को छलने की चाल है. कलक्ट्रेट कर्मियों की हड़ताल पर ऐरी ने कहा कि सरकार को इस विषय में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए. प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक नारायण जंतवाल, पुष्पेश त्रिपाठी, चंद्रशेखर कापड़ी, चंद्रशेखर पुनेड़ा, पुष्कर धामी, पुष्कर धामी आदि थे.

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