उत्तराखंड में बारिश से तबाही

उत्तराखंड आजकल भारी बारिश से बेहाल है. पहाड़ की कई नदियां उफान पर हैं. टिहरी गढ़वाल की सोंग आदि कई नदियों ने तबाही मचाई है. बाढ़ से काश्तकारों के मकानों के अलावा, खेत खलिहान को भारी नुकसान पहुंचा है. उधर हेंवलनदी ने लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं. कई दुकानें व मकान खतरे की जद में हैं. नागणी से लेकर खाड़ी तक कई जगहों में भारी नुकसान हुआ है.
हेंवलनदी के ऊफान पर होने से दर्जनों दुकानें व मकान खतरे की जद में है. गत दिनों हुई भारी बारिश से नदी ऊफान पर आ गई थी. नागणी से लेकर खाड़ी तक दुकानों व मकानों को खतरा बना हुआ है. कइयों ने दुकानें व मकान खाली कर दिए हैं. आमसेरा में आधा दर्जन दुकानें खतरे की जद में हैं यहां एक बड़ा होटल कभी भी गिर सकता है. होटल खाली करा दिया गया है. बिडोन में भी दो होटल खाली कर दिए हैं. नदी में बाढ़ के कारण नदी के दोनों ओर सिंचित खेत तो बहे ही हैं यहां अब दुकानें व मकानों को खतरा पैदा हो गया है.
दूसरी तरफ, ऋषिकेश-श्रीनगर हाईवे बंद होने के कारण शहर में सब्जी, पेट्रोल, दूध आदि की सप्लाई पर प्रभावित हुई है. सब्जियों के दाम भी आसमान में पहुंच गए हैं.
पिछले दिनों की भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग से सोमवार सुबह तक आवाजाही सुचारु नहीं हो पाई. इस कारण शहर में सब्जी, दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई नहीं पहुंच पा रही।
टिहरी के रास्ते सीमित सप्लाई ही पहुंच पा रही है. अतिरिक्त भाड़ा लगने के कारण सब्जियां महंगे दामों पर बेची जा रही हैं. साथ ही नैनबाग का प्रखंड जौनपुर के लामकांडा, मंजगांव, सत्यों, मटियाणा व रंगड़ गांव आदि गांवों में बारिश से भारी नुकसान हुआ है. बारिश के कहर से ग्रामीणों के आवागमन के सभी रास्ते बंद हो गए हैं. नदी पर बने कई पैदल पुल बह जाने से क्षेत्र के अधिकांश गांव का अन्य जगहों से संपर्क कट हुआ है. कद्दूखाल-सत्यों रायपुर मोटर अवरुद्ध होने से गांव का आवागमन प्रभावित हो गया है. रगड गांव में चार मकान मलबा में दब गए हैं.

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