आलू के बदले नमक

पहाड़ों में खेती का उत्पादन घरों की व्यवस्था चलाने तक सीमित था. कुछ फसलें जो नकद फसलें होती थी उनको दुकानदारों या ठेकेदारों को अन्य अन्न के बदले अदलाबदली की जाती थी. पहाड़ों में कई इलाकों में आलू और चोलाई (मारछा) बड़ी मात्रा में होता था. लोग आलू और चोलाई को उठाकर आलू के ठेकेदार को या गांव के दुकानदारों को देकर उसके बदले नामक लेते थे. तब मंडियों में क्या भाव चल रहा है पहाड़ के भोले-भाले लोग नहीं जानते थे और ठेकेदारों से ओने-पौने दामों में आलू बेच देते थे. आलू के बदले सबसे सस्ता नामक दिया जाता था. लोग कुन्तल के हिसाब से नमक को लाकर रखते थे. पहाड़ों में रोटी के साथ नमक की आवश्यकता तब इतनी ज्यादा थी कि मीलों चलकर लोग नमक के थैले आलू के बदले लेके जाते थे. चोलाई थोड़ा ज्यादा दाम पर जाती थी और इसके बदले भी चावल या आटा मिलता था.

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